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✨ QELUNARIS’ JUSTICE OF THE DAY ✨ 🌿 “Achieving everything is not the only definition of success…”

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🌿 “Achieving everything is not the only definition of success…” In life, we keep running after so many things— money, respect, recognition, success… One goal after another, always trying to achieve more. But have you ever stopped and asked yourself— “What did I lose while trying to gain all of this?” Some people earn a lot of money, but lose their peace. Some become known by thousands, but slowly become strangers to their own people. Some go very far in life, but drift so far away from themselves that one day they struggle to find the person they used to be. 🌱 So, don’t measure your life only by how much you have achieved. Sometimes, ask yourself— Is your sleep peaceful? Are your relationships genuine? Is your smile truly from the heart? And is the person inside you still as beautiful as before? Because the greatest success in life is not having everything— it is having everything you wanted without losing yourself along the way. ❤️ 🌿 Remember— Life is not a race where you must alwa...

✨ QELUNARIS का आज का न्याय ✨ 🌿 “सब कुछ हासिल कर लेना ही सफलता नहीं है…”

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🌿 “सब कुछ हासिल कर लेना ही सफलता नहीं है…” ज़िंदगी में हम बहुत कुछ पाने के लिए भागते रहते हैं— पैसा, सम्मान, पहचान, सफलता… एक के बाद एक लक्ष्य हासिल करते जाते हैं। लेकिन क्या कभी रुककर खुद से पूछा है— “इन सबको पाने की कोशिश में मैंने क्या खो दिया?” कोई बहुत पैसा कमाता है, लेकिन अपनी शांति खो देता है। कोई हजारों लोगों के बीच मशहूर हो जाता है, लेकिन अपने ही लोगों से दूर हो जाता है। कोई ज़िंदगी में बहुत आगे निकल जाता है, लेकिन खुद से इतना दूर हो जाता है कि एक दिन अपने पुराने स्वरूप को ही खोजने लगता है। 🌱 इसलिए ज़िंदगी में सिर्फ यह मत देखिए कि आपने कितना हासिल किया है। कभी-कभी यह भी देखिए— आपकी नींद सुकून भरी है या नहीं, आपके रिश्ते सच्चे हैं या नहीं, आपकी मुस्कान दिल से है या नहीं, और आपके अंदर का इंसान आज भी उतना ही खूबसूरत है या नहीं। क्योंकि ज़िंदगी की सबसे बड़ी सफलता सब कुछ हासिल करना नहीं है— बल्कि सब कुछ हासिल करने के बाद भी खुद को न खोना है। ❤️ 🌿 याद रखिए— ज़िंदगी कोई ऐसी दौड़ नहीं है जिसमें हर हाल में सबसे आगे पहुँचना हो। ज़िंदगी एक सफर है— जहाँ अंत में यह ज्यादा मायने रखता है ...

✨ QELUNARIS-এর আজকের সুবিচার ✨ 🌿 “সবকিছু পাওয়াই সাফল্য নয়…”

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🌿 “সবকিছু পাওয়াই সাফল্য নয়…” জীবনে আমরা অনেক কিছু পাওয়ার জন্য ছুটে চলি— টাকা, সম্মান, পরিচিতি, সাফল্য… একটার পর একটা লক্ষ্য পূরণ করি। কিন্তু কখনো কি থেমে নিজেকে জিজ্ঞেস করেছি— “এই সবকিছু পাওয়ার পথে আমি কী হারিয়ে ফেললাম?” কেউ অনেক টাকা উপার্জন করে, কিন্তু হারিয়ে ফেলে শান্তি। কেউ হাজার মানুষের পরিচিত হয়, কিন্তু নিজের মানুষগুলোর কাছেই অচেনা হয়ে যায়। কেউ জীবনে অনেক দূর এগিয়ে যায়, কিন্তু নিজের কাছ থেকে এতটাই দূরে চলে যায় যে একদিন নিজের পুরোনো মানুষটাকেই খুঁজে পায় না। 🌱 তাই জীবনে শুধু কতটা অর্জন করেছেন, সেটা দিয়ে নিজের সাফল্য মাপবেন না। মাঝে মাঝে এটাও দেখুন— আপনার ঘুমটা শান্ত কিনা, আপনার সম্পর্কগুলো সত্যি কিনা, আপনার হাসিটা স্বাভাবিক কিনা, আর আপনার ভেতরের মানুষটা এখনও আগের মতো সুন্দর আছে কিনা। কারণ জীবনের সবচেয়ে বড় সাফল্য সবকিছু পাওয়া নয়— সবকিছু পাওয়ার পরও নিজেকে হারিয়ে না ফেলা। ❤️ 🌿 মনে রাখবেন— জীবন একটা দৌড় নয়, যেখানে সবার আগে পৌঁছাতে হবে। জীবন একটা যাত্রা— যেখানে শেষ পর্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ হয়ে ওঠে আপনি কতদূর গেলেন নয়, কেমন মানুষ হয়ে সেখানে পৌঁছালেন। 💭 আপনার কাছে...

QELUNARIS’ JUSTICE OF THE DAY ✨ 🌿 Not Everyone Will Understand Your Worth...

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🌿 Not Everyone Will Understand Your Worth... There will always be people in life for whom you can do everything right, yet they will never choose to see the goodness within you. They may question your intentions, mistake your silence for weakness, and even consider your kindness to be your vulnerability. But remember one thing— it is not your responsibility to prove yourself good in everyone’s eyes. So, stop trying to explain yourself to everyone. Because when someone has already decided not to understand you, a thousand explanations will never be enough. 🌱 Just keep doing your work with honesty. Not for someone’s praise, not for someone’s approval, and not to prove your worth to anyone— but live in such a way that when you look into the mirror at the end of the day, your own conscience never turns away from you. Because the world’s applause may last for a moment, but the peace of your conscience stays with you for a lifetime. 🌸 Remember— A flower never needs permission to bloom. It...

✨ क्यूलुनारिस का आज का न्याय ✨ 🌿 हर कोई आपकी कीमत नहीं समझेगा...

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🌿 हर कोई आपकी कीमत नहीं समझेगा... ज़िंदगी में कुछ लोग ऐसे भी होंगे, चाहे आप उनके लिए कितना भी अच्छा कर लें, वे कभी भी आपमें अच्छाई नहीं देख पाएंगे। आपकी नीयत पर सवाल उठाएंगे, आपकी चुप्पी को कमजोरी समझेंगे, और आपकी अच्छाई को आपकी मजबूरी मान लेंगे। लेकिन एक बात हमेशा याद रखिए— हर किसी की नज़र में अच्छा साबित होना, आपकी ज़िम्मेदारी नहीं है। इसलिए हर किसी के सामने खुद को साबित करने की कोशिश मत कीजिए। क्योंकि जो आपको समझना ही नहीं चाहता, उसके सामने हजारों सफाई भी बेकार हैं। 🌱 आप बस अपना काम ईमानदारी से करते रहिए। किसी की तारीफ़ पाने के लिए नहीं, किसी से पहचान बनाने के लिए नहीं, बल्कि इसलिए— ताकि रात को जब आप आईने में खुद को देखें, तो आपकी अंतरात्मा आपसे नज़रें न चुराए। क्योंकि दुनिया की तालियाँ कुछ समय के लिए होती हैं, लेकिन अपने विवेक की शांति उम्रभर साथ रहती है। 🌸 याद रखिए— फूलों को खूबसूरत होने के लिए किसी की इजाज़त की ज़रूरत नहीं होती।  वे बस खिलते हैं, अपनी खुशबू बिखेरते हैं और अपनी पहचान खुद बना लेते हैं। एक दिन लोग आपकी बातें भूल जाएंगे, आपने क्या कहा—यह भी भूल जाएंगे, लेकिन आ...

✨ QELUNARIS-এর আজকের সুবিচার ✨ 🌿 সবাই আপনার মূল্য বুঝবে না...

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🌿 সবাই আপনার মূল্য বুঝবে না... জীবনে এমন কিছু মানুষ থাকবেই, আপনি তাদের জন্য যতই ভালো কিছু করুন না কেন, তারা কখনোই আপনার ভালো দিকটা দেখতে চাইবে না। আপনার উদ্দেশ্য নিয়ে প্রশ্ন তুলবে, আপনার নীরবতাকে দুর্বলতা ভাববে, আর আপনার ভালো মানুষ হওয়াটাকেও আপনার দুর্বলতা বা বাধ্যবাধকতা মনে করবে। কিন্তু একটা কথা সবসময় মনে রাখবেন— সবার চোখে নিজেকে ভালো প্রমাণ করা আপনার দায়িত্ব নয়। তাই সবার সামনে নিজেকে প্রমাণ করার চেষ্টাও করবেন না। কারণ যে মানুষ আপনাকে বুঝতেই চায় না, তার সামনে হাজারটা ব্যাখ্যাও কখনো যথেষ্ট হবে না। 🌱 আপনি শুধু নিজের কাজটা সততার সঙ্গে করে যান। কারও প্রশংসা পাওয়ার জন্য নয়, কারও স্বীকৃতি পাওয়ার জন্য নয়, কারও কাছে নিজের পরিচয় তৈরি করার জন্যও নয়— বরং এমনভাবে বাঁচুন, যাতে প্রতিদিন আয়নায় নিজের দিকে তাকালে আপনার বিবেক আপনার কাছ থেকে মুখ ফিরিয়ে না নেয়। কারণ পৃথিবীর প্রশংসা হয়তো কিছু সময়ের জন্য থাকে, কিন্তু নিজের বিবেকের শান্তি সারাজীবন সঙ্গে থাকে। 🌸 মনে রাখবেন— ফুলকে সুন্দর হয়ে ফুটতে কারও অনুমতির প্রয়োজন হয় না। সে শুধু ফুটে ওঠে, নিজের সৌন্দর্য ছড়িয়ে দেয় আর নিজের পরিচয়...

✨ QELUNARIS का आज का न्याय ✨ 🌿 सभी उत्तरों को मौखिक रूप से व्यक्त करना आवश्यक नहीं है...

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🌿 सभी उत्तरों को मौखिक रूप से व्यक्त करना आवश्यक नहीं है... जिंदगी में कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो आपको गलत समझेंगे।  अपनी खामोशी को कमजोरी समझो,  और आपकी खैरियत के बारे में सवाल करेंगे. हर बात का जवाब देना ज़रूरी नहीं है. समय को कुछ उत्तर देने दीजिए।  क्योंकि समय से बड़ा कोई न्यायाधीश नहीं है. बस अपने प्रति ईमानदार रहें.  लोगों के प्रति दयालु रहें.  और अपने विवेक के प्रति स्पष्ट रहें. समय बताएगा कि कौन सही था और कौन सिर्फ शब्दों से सही साबित होने की कोशिश कर रहा था। 🌿💭क्या आपको लगता है कि सभी शब्दों का उत्तर देना महत्वपूर्ण है? 👇अपनी राय दें।

✨ Today's Justice of qelunaris ✨ 🌿 “Not all answers have to be verbalized…”

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🌿 “Not all answers have to be verbalized…” There will be some people in life who will misunderstand you.  Think your silence is weakness,  And will question your well-being. Not everything needs to be answered. Let time provide some answers.  Because there is no greater judge than time. Just be honest with yourself.  Be kind to people.  And be clear to your conscience. Time will tell who was right, and who was just trying to be proven right by words. 🌿 💭 Do you think it is important to answer all the words? 👇 Give your opinion.

✨ QELUNARIS-এর আজকের সুবিচার ✨ 🌿 “সব উত্তর মুখে দিতে হয় না…”

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🌿 “সব উত্তর মুখে দিতে হয় না…” জীবনে এমন কিছু মানুষ আসবে, যারা আপনাকে ভুল বুঝবে,  আপনার নীরবতাকে দুর্বলতা ভাববে,  আর আপনার ভালো থাকাটাকেও প্রশ্ন করবে। সবকিছুর উত্তর দেওয়ার প্রয়োজন নেই। কিছু উত্তর সময়কে দিতে দিন।  কারণ সময়ের চেয়ে বড় বিচারক আর কেউ হয় না। আপনি শুধু নিজের জায়গায় সৎ থাকুন,  মানুষের প্রতি ভালো থাকুন,  আর নিজের বিবেকের কাছে পরিষ্কার থাকুন। একদিন সময়ই বলে দেবে— কে ঠিক ছিল, আর কে শুধু শব্দের জোরে ঠিক প্রমাণিত হতে চেয়েছিল।  🌿 💭 আপনি কি মনে করেন—সব কথার উত্তর দেওয়া জরুরি? 👇 আপনার মতামত জানাবেন।

✨ QELUNARIS-এর নতুন পথচলা ✨ 🌿 একটি কথা… একটু ভাবনার জন্য। 🌿

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🌿 একটি কথা… একটু ভাবনার জন্য। 🌿 প্রতিদিনের ব্যস্ত জীবনে আমরা অনেক কথা শুনি, অনেক কিছু দেখি— কিন্তু কিছু কথা থাকে, যা আমাদের একটু থামিয়ে ভাবতে শেখায়। সেই ভাবনা থেকেই আগামীকাল, ১ সেপ্টেম্বর থেকে আমার এই ID-তে শুরু হতে চলেছে একটি নতুন ধারাবাহিক— ✨ “QELUNARIS-এর আজকের সুবিচার” ✨ প্রতিদিন থাকবে একটি করে ছোট্ট ভাবনা— কখনও জীবন নিয়ে, কখনও মানুষ ও সম্পর্ক নিয়ে, কখনও সমাজ নিয়ে, আবার কখনও এমন কোনো সত্য নিয়ে যা হয়তো আমরা জানি, কিন্তু ভাবি না। 📖 একটি পোস্ট হয়তো কয়েক সেকেন্ড সময় নেবে পড়তে, কিন্তু তার ভাবনাটি হয়তো অনেকক্ষণ মনে থেকে যাবে। আমি চাই না শুধু আমি লিখব— আপনারাও পড়বেন, ভাববেন এবং নিজের মতামত জানাবেন। ❤️ তাই আগামীকাল থেকে সঙ্গে থাকুন। হয়তো কোনো একটি “সুবিচার” একদিন আপনার নিজের জীবনের কথাই বলে দেবে। 🌿 আগামীকাল দেখা হচ্ছে… ❤️ — Bijay Shil ✨ QELUNARIS Be Rare. Be Kind. Be Remembered.

অন্নপূর্ণা ভাণ্ডার ( অন্নপূর্ণা যোজনা)অর্থনৈতিক দৃষ্টিভঙ্গি:

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অন্নপূর্ণা ভাণ্ডার ( অন্নপূর্ণা যোজনা) অর্থনৈতিক দৃষ্টিভঙ্গি: সরাসরি ভাতা দিলে তা সাময়িক উপকারে আসে এবং তা মূলত দৈনন্দিন খরচে শেষ হয়ে যায়।  কিন্তু সেই টাকা সম্পদ সৃষ্টিতে (Asset Creation) এবং উৎপাদনে ব্যবহার করলে তা স্থায়ী কর্মসংস্থান তৈরি করে,  যা রাজ্যের জিডিপি (GDP) বাড়াতে এবং নারীদের প্রকৃত ক্ষমতায়নে সাহায্য করে। খরচের হিসেব প্রথম কিস্তি (জুন ২০২৬): জুন মাসের ৩ তারিখে যখন প্রথম এই প্রকল্পের টাকা দেওয়া হয়, তখন যাচাইকরণের পর ২৮ লক্ষ ২৫ হাজারেরও বেশি মহিলা প্রথম দফার টাকা পেয়েছে  দ্বিতীয় কিস্তি (১ জুলাই ২০২৬): জুলাই মাসের ১ তারিখে উপভোক্তা ১ কোটি ৩০ লক্ষ  সংখ্যায় প্রকাশ: ১৩,০০০,০০০ × ৩,০০০ কোটি হিসেবে: ৩,৯০০ কোটি টাকা (প্রতি মাসে পশ্চিমবঙ্গ সরকারের এই পরিমাণ টাকা উপভোক্তাদের দিতে খরচ হয়েছে )। ভবিষ্যতের লক্ষ্য রাজ্য সরকারের পক্ষ থেকে জানানো হয়েছে যে স্ক্রুটিনি এবং নতুন আবেদন প্রক্রিয়া সম্পূর্ণ হলে রাজ্যের প্রায় ২ কোটি যোগ্য মহিলা এই প্রকল্পের আওতায় আসবেন। সংখ্যায় প্রকাশ: ২০,০০০,০০০ × ৩,০০০ কোটি হিসেবে: ৬,০০০ কোটি টাকা (সব যোগ্য উপভোক্তা যুক্ত হলে প্রতি মা...

সালটা 1971 ভারতীয় সেনাবাহিনী সিন্ধুর থারপারকার জেলাকে ভারতের অন্তর্ভুক্ত করে গুজরাটের একটি নতুন জেলা হিসেবে ঘোষণা করেছিল এবং মুজাফফারাবাদ সংসদের উপর ত্রিবর্ণ পতাকা উত্তোলন করা হয়েছিল

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আমরা প্রায়শই ১৯৭১ সালের যুদ্ধের জন্য ইন্দিরা গান্ধীর প্রশংসা করি, কিন্তু পাকিস্তানের সংসদে বেনজির ভুট্টোর স্বামী আসিফ আলী জারদারির দেওয়া এই বিবৃতিটি আমাদের অবশ্যই পড়া উচিত। যখন ৯০,০০০-এরও বেশি পাকিস্তানি সৈন্য ভারতীয়দের হাতে বন্দী ছিল এবং তাদের ৩,০০০-এরও বেশি সামরিক কর্মকর্তা আমাদের হেফাজতে ছিলেন... তখন পাকিস্তানি সেনাবাহিনী আত্মসমর্পণ করেছিল। .....ভারতীয় সেনাবাহিনী সিন্ধুর থারপারকার জেলাকে ভারতের অন্তর্ভুক্ত করে গুজরাটের একটি নতুন জেলা হিসেবে ঘোষণা করেছিল এবং মুজাফফারাবাদ সংসদের উপর ত্রিবর্ণ পতাকা উত্তোলন করা হয়েছিল। .....জুলফিকার আলী ভুট্টো যখন ইন্দিরা গান্ধীর সঙ্গে সিমলা চুক্তি স্বাক্ষর করতে এসেছিলেন। তখন তিনি তাঁর কন্যা বেনজির ভুট্টোকে সঙ্গে নিয়ে এসেছিলেন।জুলফিকার আলী ভুট্টো তাঁর কন্যাকে রাজনীতি শেখাচ্ছিলেন। .....ইন্দিরা গান্ধী জুলফিকার আলী ভুট্টোর সামনে একটি শর্ত রাখলেন...  "যদি আপনি আপনার ৯৩,০০০ সৈন্য ফেরত চান, তবে আপনাকে কাশ্মীর হস্তান্তর করতে হবে।" জুলফিকার আলী ভুট্টো ইন্দিরা গান্ধীকে বললেন... "আমরা আপনাকে কাশ্মীর দেব না, আমি কোন কিছুতে স্বাক্ষ...

কলকাতার আদী গংগার যদি সংস্কার হয় তবে পশ্চিমবঙ্গে সরকারের প্রতিমাসে মিনিমাম হাজার কোটি টাকা আয় হবে কিভাবে হবে

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কলকাতার আদী গংঙ্গা যদি সংস্কার হয়  তবে  পশ্চিমবঙ্গে সরকারের প্রতিমাসে মিনিমাম হাজার কোটি টাকা আয় হবে  কিভাবে হবে চলুন দেখাযাক 1:- কলকাতা এরিয়া আদী গংগার শুরু থেকে শেষ অবধি  নদীর দুই পাড়ে যতোটা জমি নদীর আওতায় পরে সেই জমি রেলিং দিয়ে ঘিরে নদীর একদম পাশাপাশি ফুটপাত তৈরী করা  এবং ফুটপাত আর রেলিংয়ের মধ্যে যে জমি থাকবে তাতে বিভিন্ন ধরনের ছোট গাছ লাগিয়ে   লাইটিং দিয়ে সাজিয়ে পার্ক তৈরী করা ( প্রবেশ ফ্রী থাকবে ) কোনপ্রকার যানবাহন ঢোকা নিষিদ্ধ করতে হবে 2 :- 1 অথবা 2 কিলোমিটার অন্তর অন্তর গাড়ি পার্কিংয়ের (পার্কিং ফি দিয়ে) ব‍্যাবস্থা রাখতে হবে 3:- প্রত‍্যেক পার্কিংয়ে সরকারি ভাবে  কিছু পার্মানেন্ট ফাস্টফুডের স্টল তৈরী করে ভাড়ায় দিতে হবে 4:- আদী গংঙ্গার শুরু থেকে শেষ অবধি  প‍্যাসেঞ্জার বোট চালাতে হবে ( তাহলে কলকাতার বাসের ভির কুমবে এবং রাস্তায় যনজট কুমবে ) 5:- পর্যটকদের জন্য ছোট ছোট বোট চালাতে হবে শুধুমাত্র কলকাতা এরিয়ার মধ্য  আদী গংঙ্গার এবং কলকাতার উন্নতি নিয়ে চিন্তাভাবনা করলে আরো বহু কিছু করা সম্ভব  #everyoneシ゚ #reels #FacebookPage ...

গান্ধীজি অহিংস ছিলেন না। অহিংস ছিল তাঁর মুখোশ।

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নেতাজি সুভাষকে তিনি কংগ্রেস থেকে সরিয়েছিলেন হিংসার অনলে জ্বলে। প্রমাণ ১৯৩৯ সালে ত্রিপুরি কংগ্রেসের সভাপতি নির্বাচন। সুভাষ নির্বাচনে দাঁড়ালেন গান্ধীজির অমতে। কী এত বড় স্পর্ধা সুভাষের! গান্ধীজি অবাক। তাই তিনি তাঁর মনোনীত প্রার্থী পট্টভি সীতারামাইয়াকে সুভাষের বিরুদ্ধে দাঁড় করালেন। জয়ী হলেন সুভাষ। ফল হল মারাত্মক।               গান্ধী ও নেতাজি সুভাষচন্দ্র বসু নির্বাচনে নেতাজীর জয় লাভের পর গান্ধীজির উক্তি: ‘The defeat of Pattabhi Sitaramyya is my defeat’ অর্থাৎ পট্টভি সীতারামাইয়ার পরাজয় মানে আমার পরাজয়।’ এ কী সাংঘাতিক কথা! জনগণের ভোটে নির্বাচিত সভাপতি সুভাষচন্দ্র বসুর জয়ে হঠাৎ মহাত্মার মত মানুষের এই ধরনের উক্তির কারণ কী? কারণ হিসেবে বলা হল গান্ধীজির নীতির কথা। গান্ধীজি অহিংসার পুজারী, অহিংস নীতিতে বিশ্বাসী। সুভাষ ঠিক এর বিপরীত। তাই সুভাষের জয় মানেই গান্ধীজির অহিংস নীতির পরাজয়। কিন্তু সত্যিই কি তাই? আদৌ তা নয়।  অক্ষমতার জন্য অহিংসার বুলি। আসলে সুচতুর গান্ধীজিকে বিচলিত করেছিল সুভাষের জয়। তিনি চরম হিংসা করতেন নেতাজীর জনপ্রিয়তাকে...

ইতিহাসের দর্পণে ১৯৬৬-র গো-রক্ষা আন্দোলন: করপাত্রী মহারাজ ও ইন্দিরা গান্ধীর সেই ‘অভিশপ্ত’ অধ্যায়

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ভারতের রাজনৈতিক ও আধ্যাত্মিক ইতিহাসে ১৯৬৬ সালের ৭ই নভেম্বর একটি অত্যন্ত বেদনাদায়ক এবং বিতর্কিত দিন হিসেবে চিহ্নিত। এই দিনটি ছিল ‘গোপষ্টমী’। দিল্লির সংসদ ভবনের সামনে কয়েক লক্ষ সাধু-সন্ত ও গো-ভক্তদের ওপর পুলিশের গুলিচালনা এবং এর সাথে জড়িয়ে থাকা স্বামী করপাত্রী মহারাজের ‘অভিশাপ’ আজও জনশ্রুতি ও ঐতিহাসিক আলোচনায় প্রাসঙ্গিক। প্রতিশ্রুতি ও বিশ্বাসের প্রেক্ষাপট জনশ্রুতি এবং আধ্যাত্মিক গ্রন্থসমূহের বর্ণনা অনুযায়ী, লাল বাহাদুর শাস্ত্রীর আকস্মিক প্রয়াণের পর যখন দেশের পরবর্তী প্রধানমন্ত্রী নির্বাচন নিয়ে জটিলতা চলছিল, তখন ইন্দিরা গান্ধী আশীর্বাদের জন্য প্রখ্যাত আধ্যাত্মিক সাধক স্বামী করপাত্রী মহারাজের শরণাপন্ন হন। করপাত্রী মহারাজ ছিলেন তৎকালীন হিন্দু সমাজের এক প্রভাবশালী কণ্ঠস্বর। তিনি ইন্দিরা গান্ধীকে প্রধানমন্ত্রী হওয়ার আশীর্বাদ দিলেও একটি শর্ত দিয়েছিলেন— প্রধানমন্ত্রী হওয়ার পর তাকে দেশজুড়ে ‘গো-বংশ’ হত্যা সম্পূর্ণ নিষিদ্ধ করতে হবে। বলা হয়, ক্ষমতায় আসার মোহে ইন্দিরা গান্ধী সেই সময় এই প্রতিশ্রুতি দিয়েছিলেন। ৭ নভেম্বর ১৯৬৬: সংসদ ভবনের সামনে সেই রক্তক্ষয়ী দিন প্রধানমন্ত্রী হওয়ার বেশ কিছু ...

#জওহরলাল_নেহেরুর কৌশলগত উদাসীনতার ফলে 97% বৌদ্ধ ও হিন্দু সংখ্যাগরিষ্ঠ চট্টগ্রাম কিভাবে পূর্ব পাকিস্তানের ভাগে চলে যায়, তাই নিয়েই কিছু তথ্য দেবো।

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1947 সালে দেশভাগের সময় চট্টগ্রাম (মূলত চট্টগ্রাম পার্বত্য অঞ্চল) পূর্ব পাকিস্তানের অন্তর্ভুক্ত হওয়ার পেছনে প্রধানত সিরিল র‍্যাডক্লিফ এবং জওহরলাল নেহেরুর কৌশলগত উদাসীনতাকে দায়ি করা হয়। সিরিল র‍্যাডক্লিফের নিজস্ব নথিতে উল্লেখ ছিলো যে, কলকাতা বন্দর ভারত পেয়ে যাওয়ায় পূর্ব পাকিস্তানের জন্য চট্টগ্রাম বন্দর অপরিহার্য। তাই চট্টগ্রাম পার্বত্য অঞ্চলকে ওই বন্দর শহরের 'হিন্টারল্যান্ড' বা সংযোগকারী এলাকা হিসেবে পাকিস্তানের অধীনে দিয়ে দেওয়া উচিত।   পার্বত্য চট্টগ্রামের তৎকালীন জনসমিতি নেতা স্নেহা কুমার চাকমা এবং কামিনী মোহন দেওয়ান তাঁদের বিভিন্ন স্মৃতিকথা ও সাক্ষাৎকারে উল্লেখ করেছেন যে, তারা দিল্লিতে প্রায় 50 দিন অপেক্ষা করেও নেহেরুর কাছ থেকে কার্যকর কোনো প্রতিশ্রুতি পাননি। নেহেরু তখন আন্তর্জাতিক সম্পর্কের দোহাই দিয়ে এবং র‍্যাডক্লিফের সিদ্ধান্ত মেনে নেওয়ার বাধ্যবাধকতা দেখিয়ে তাঁদের ফিরিয়ে দিয়েছিলেন। এর পর চাকমা প্রতিনিধিরা ভারতের প্রথম স্বরাষ্ট্রমন্ত্রী সর্দার বল্লভভাই প্যাটেলের সাথে দেখা করলে তিনি সহানুভূতি দেখালেও, চূড়ান্ত সিদ্ধান্ত নেহেরুর হাতে থাকায় অসহায়ত্ব প্রকাশ করেন। 19...

জাভেদ খানানি: এক অদৃশ্য যুদ্ধ এবং ভারতের নোটবন্দির নেপথ্য কাহিনী

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জাভেদ খানানি এবং ২০১৬ সালের নোটবন্দি বা ডিমোনিটাইজেশন নিয়ে একটি তথ্যবহুল ও রোমাঞ্চকর নিবন্ধ নিচে দেওয়া হলো :- জাভেদ খানানি: এক অদৃশ্য যুদ্ধ এবং ভারতের নোটবন্দির নেপথ্য কাহিনী আপনি কি মনে করেন সিনেমার পর্দায় দেখা ভয়ংকর সব ভিলেনরাই সবচেয়ে শক্তিশালী? যদি তাই ভেবে থাকেন, তবে আপনি হয়তো জাভেদ খানানি নামক এই রক্তমাংসের মানুষটি সম্পর্কে জানেন না। অপরাধ জগতের বড় বড় ডন বা ষড়যন্ত্রকারীরা একদিকে, আর এই জাভেদ খানানি ছিল অন্যদিকে। সে ছিল এমন এক ব্যক্তি, যে চাইলে একাই পুরো ভারতের অর্থনীতিকে পঙ্গু করে দিতে পারত। এশিয়ার সবচেয়ে বড় হাওয়ালা নেটওয়ার্ক ২০১৬ সালের আগে পর্যন্ত জাভেদ খানানি এশিয়ার সবচেয়ে বড় হাওয়ালা নেটওয়ার্ক পরিচালনা করত। তার এই জাল এতটাই বিস্তৃত ছিল যে, কোনো শারীরিক নগদ অর্থ লেনদেন ছাড়াই সে পৃথিবীর এক প্রান্ত থেকে অন্য প্রান্তে কয়েক হাজার কোটি টাকা পাচার করে দিতে পারত। কিন্তু তার আসল চাল ছিল অন্য জায়গায়। পাকিস্তানের মাটিতে বসে সে উন্নত মানের জাল ভারতীয় মুদ্রা (Fake Indian Currency) ছাপাত এবং তার নিজস্ব হাওয়ালা নেটওয়ার্কের মাধ্যমে তা ভারতের বাজারে ছড়িয়ে দিত। ভারতের অর্থনীতিতে ক্যান...

মুজিবর রহমান ছিল অশিক্ষিত বা কুশিক্ষিত বাঙালি মুসলমান যার মধ্যে জাতীয়তাবোধের লেশমাত্রও ছিল না৷

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মুজিবর রহমান ছিল অশিক্ষিত বা কুশিক্ষিত  বাঙালি মুসলমান যার মধ্যে জাতীয়তাবোধের লেশমাত্রও ছিল না৷  সে  ছিল সীমাহীন লোভী, হিন্দু বিদ্বেষী বেইমান এবং ১৯৪৬ সালের " দাঙ্গায়" বাংলা প্রদেশের " প্রধানমন্ত্রী" এইচ এম সোহরাওয়ার্দী এর শাগরেদ৷ একমাত্র  এই লোকটার প্রতি বিশ্বস্ত থেকেছে এই দেশদ্রোহী, ভারতের মানুষের শত্রু মুজিবর৷ একই লোক দুইবার দেশ ভাঙায় সক্রিয় থেকেছে- গঠন মূলক কাজ কোনদিন কিছুই করে নি৷  কংগ্রেস দলের সহায়তায় বাংলায় মুসলিম লিগ দল ক্ষমতায় আসে  ১৯৪৩ সালে৷  কারণ ফজলুল হকের সঙ্গে জোট বেঁধে সরকার গড়তে চায় নি গান্ধীর অনুগতরা৷ এর পর গণহত্যা এবং দেশভাগ যাতে অমুসলিমদের মরতে দিয়েই হয় পাকিস্তান৷ জিন্নাহ মানুষটাকে জাতীয়তাবাদী থেকে সঙ্কীর্ণ সাম্প্রদায়িক করেছিল সেই কংগ্রেস৷ এই দলের মূল চক্রী মোহন গান্ধীকে সময়ে হত্যা করা ছিল জরুরি৷ আধুনিক ম্যানেজমেন্ট সায়েন্সের কি পার্সন বলা যায় এই নরাধম গান্ধীকে৷ সবচেয়ে অশিক্ষিত,   অযোগ্য অপদার্থ,ক্লীব,  সমাজবিরোধী লোকগুলাই তখন রাজনীতিতে৷ যে বিদ্যায় এক কোম্পানি বা সংস্থা চালানোর তত্ত্ব আলোচনা করা হয় সেটা দেশ...

আমি কেন গান্ধীকে হত্যা করেছি!

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সুপ্রিম কোর্টের অনুমতি পাওয়ার পর প্রকাশিত নাথুরাম গডসের শেষ ভাষণ, যা ৬০ বছর ধরে ভারতে নিষিদ্ধ ছিল - #আমি কেন_গান্ধীকে_হত্যা করেছি! ১৯৪৮ সালের ৩০শে জানুয়ারী নাথুরাম গডসে করমচাঁদ গান্ধীকে গুলি করে হত্যা করেন। তবে তিনি ঘটনাস্থল থেকে পালিয়ে যাননি বরং আত্মসমর্পণ করেন। আদালতে নাথুরাম গডসের বক্তব্যের কিছু গুরুত্বপূর্ণ অংশ: আমি গান্ধীকে হত্যা করিনি। আমি গান্ধীকে বধ করেছি। তিনি আমার শত্রু ছিলেন না, কিন্তু তার সিদ্ধান্ত জাতির জন্য মারাত্মক প্রমাণিত হচ্ছিল। যখন একজন ব্যক্তির কাছে অন্য কোন বিকল্প থাকে না, তখন তাকে সঠিক কাজ করার জন্য ভুল পথ বেছে নিতে বাধ্য করা হয়। মুসলিম লীগের প্রতি গান্ধীর ইতিবাচক প্রতিক্রিয়া এবং পাকিস্তান তৈরির ভুল নীতিই আমাকে বাধ্য করেছিল। পাকিস্তানের ৫৫ কোটি টাকা দেওয়ার অযৌক্তিক দাবির প্রতিবাদে গান্ধী অনশন ধর্মঘটে গিয়েছিলেন। দেশভাগের সময় পাকিস্তান থেকে পালিয়ে আসা হিন্দুদের অগ্নিপরীক্ষা এবং দুর্দশা আমাকে নাড়া দিয়েছিল। গান্ধীর কারণে অবিভক্ত হিন্দু জাতি মুসলিম লীগের কাছে আত্মসমর্পণ করছিল। একজন মাকে তার ছেলেদের সামনে টুকরো টুকরো করে ছিঁড়ে ফেলার দৃশ্য অসহনীয়...

প্রসঙ্গ মরিচঝাঁপি।

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আমরা ভুলবও না, ভুলতে দেবও না। মরিচঝাঁপি সুন্দরবনের একটি দ্বীপ—মূল ভূখণ্ড থেকে বহু দূরে, চারদিক নোনা জলে ঘেরা। এই দ্বীপের ইতিহাস শুধু একটি ভূখোলিক পরিচয়ের নয়, এটি বাঙালি হিন্দু উদ্বাস্তুদের বেদনা, বঞ্চনা ও রক্তের ইতিহাস। দেশভাগ ও সাম্প্রদায়িক দাঙ্গার ফলে বহু বাঙালি হিন্দু তৎকালীন পূর্ব পাকিস্তান, বর্তমান বাংলাদেশ থেকে প্রাণ বাঁচিয়ে পশ্চিমবঙ্গে আশ্রয় নিতে আসে। প্রথম সারির উচ্চ ও মধ্যবিত্ত শ্রেণির মানুষরা কোনওভাবে কলকাতা ও অন্যান্য এলাকায় ঠাঁই পেলেও, দ্বিতীয় সারির বিপুল সংখ্যক নিম্নবিত্ত নমঃশূদ্র হিন্দু উদ্বাস্তুদের পশ্চিমবঙ্গে থাকতে দেওয়া হয়নি। তাদের জোর করে পাঠানো হয় দণ্ডকারণ্যের পাথুরে, জঙ্গলাকীর্ণ, আতিথেয়তাশূন্য অঞ্চলে—মূলত ওড়িশ্যা ও মধ্যপ্রদেশে। ১৯৭৭ সালে বামফ্রন্ট ক্ষমতায় আসার পর তৎকালীন মন্ত্রী রাম চ্যাটার্জী দণ্ডকারণ্যের উদ্বাস্তু শিবিরে গিয়ে তাদের পশ্চিমবঙ্গে ফিরিয়ে আনার আশ্বাস দেন। সেই আশ্বাস ছিল মিথ্যে। ভাষাগত সমস্যা, খাদ্য ও পানীয়ের অভাব, ম্যালেরিয়া ও ডায়রিয়ার মতো ভয়াবহ পরিস্থিতিতে টিকে থাকা অসম্ভব হয়ে উঠলে ১৯৭৮ সালে হাজার হাজার উদ্বাস্তু আবার বাংলার পথে রওনা দেন। ...